स्वच्छ भारत अभियान कविता

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मतवालों की टोली निकली,
सुन्दर चमन बनाने को
चम चम करता स्वच्छ दमकता,
अपना वतन बनाने को।

दिल के सच्चे साफ़ हैं हम,
ये दुनिया माने सदियों से
चलो साथियो निकलें अब,
भारत को स्वच्छ बनाने को।

हमने देखे कई करीबी,
घोषित दिल के सच्चों को
ज्ञानी ध्यानी महज़ कागज़ी,
देखा अच्छे अच्छों को।

बड़ी बड़ी बातें तो कर लीं,
छोटी बात भुला दी है
किस प्रकार की अलमस्ती है,
ये कैसी आज़ादी है।

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कैसे इनको समझायें हम,
क्या रह गया बताने को
चलो साथियो निकलें अब,
भारत को स्वच्छ बनाने को।

वेद हमारे कहते हैं,
कैसे तुम वैभव पाओगे
ढेर गंदगी मचा रखी है,
कैसे शुचिता लाओगे।

अपने घर को दिवाली पर,
रंगों से सजवाते हो
जिस धरती पर जन्म लिया है,
गंद वहीँ फैलाते हो।

सोच बदलने देश बदलने,
सोना इसे बनाने को
चलो साथियो निकलें अब,
भारत को स्वच्छ बनाने को।

मोदी जी ने कमर कसी है,
उनकी तो तैयारी है
राजा आज हो गए आंगे,
अब परजा की बारी है।

स्वस्थ स्वच्छ भारत करने,
पावन अभियान चलाया है
हमें सिखाने स्वर्ग बनाने,
एक मसीहा आया है।

मातृभूमि को जन्नत करने,
मौलिक अलख जगाने को
चलो साथियो निकलें अब,
भारत को स्वच्छ बनाने को।

https://youtu.be/nHq-Fn3kOlA

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